Friday, September 24, 2021
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राजस्थान की राजनीति में अब आगे क्या?

राजस्थान में पिछले एक माह से जो सियासी टकराव चल रहा है, उसके ख़त्म होने का समय आ गया है! राजस्थान में सियासी वर्चस्व कि इस लड़ाई में फ़िलहाल तो यह प्रतीत होता है कि एक बारगी मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की बड़ी सियासी विजय हुई है!

पूर्व उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट की कल प्रियंका गांधी एवं राहुल गांधी से हुई मुलाक़ात के बाद सियासी टकराव अब ख़त्म होता दिख रहा है! परंतु सियासी उतार चढ़ाव कि इस लड़ाई में किसने क्या खोया क्या पाया इसका सटीक विश्लेषण यहाँ जानिए-

ग़ौरतलब है कि अब से लगभग एक माह पूर्व सचिन पायलट अपनी ही कांग्रेस सरकार से नाराज़ होकर अपने समर्थित विधायकों के साथ मानेसर के एक होटेल में चले गए थे! जिसके पश्चात आनन फ़ानन में मुख्यमंत्री गहलोत ने भी अपने समर्थक विधायकों को जयपुर के होटल फेयर माउंट में रखा!

इसी बीच सचिन पायलट न तो एक बार भी मीडिया के सामने आए तथा न ही उन्होंने ख़ुद आगे से कुछ कहा! वही मुख्यमंत्री अशोक गहलोत लगातार अपनी राजनीतिक चले चलते रहें एवं आक्रामक मूड में दिखे!

मानेसर जाने से पूर्व पायलट खेमा एक उक्त उपमुख्यमंत्री पद दो मंत्री पद तथा एक युवा कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष का पद रखता था वही संगठन में भी पायलट के लोगों को अच्छे स्थान मिले हुए थे!

वहीं मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने जयपुर में यह निश्चित किया कि उनको उनकी सरकार को कोई ख़तरा न हो तथा सरकार सुरक्षित रहें! जब यह पूर्णतया निश्चित हो गया तो उन्होने पायलट को सियासी रूप से निपटाने का काम शुरू किया संगठन में जहाँ कहीं भी पायलट के लोग थे चाहे वह NSUI प्रदेश अध्यक्ष, कांग्रेस सेवादल प्रदेश अध्यक्ष, युवा कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष का पद हूँ सभी जगह से पायलट के लोगों को हटाना शुरू किया! स्वयं सचिन पायलट को भी PCC चीफ़ तथा उपमुख्यमंत्री पद से हटा दिया गया! वहीं पायलट खेमे के 2 विधायकों को मंत्री पद से भी बर्खास्त कर दिया गया!

इस प्रकार पायलट खेमा निरंतर कमज़ोर पड़ता रहा! लेकिन एक माह तक सचिन पायलट अपने विधायकों के साथ मानेसर एवं गुड़गाँव में टिके रहे हैं! वहीं बीच बीच में यह भी ख़बरें आती रही कि सचिन पायलट भाजपा के संपर्क में है! परंतु सचिन पायलट तथा उनके खेमे के विधायकों ने इस ख़बर को सिरे से नकारा!

वहीं दूसरी ओर भाजपा भी मुख्यमंत्री अशोक गहलोत पर बहूत ही आक्रामक अंदाज़ में दिखीं एवं पहली बार सियासी वर्चस्व कि इस लड़ाई में आँच राजभवन तक भी पहुँची!

इस एक माह के सियासी उतार चढ़ाव में केंद्र एवं राज्य दोनों के ही जाँच एजेंसियों का प्रयोग हुआ! चाहे वह ED, इनकम टैक्स हो या SOG.

वहीं कांग्रेस की तरफ़ से भी सचिन पायलट को मनाने की कई बार कोशिश की गई! उनके ससुर फ़ारूक़ अब्दुल्ला तथा साले उमर अब्दुल्ला के माध्यम से उनसे संपर्क करने की कोशिश की गई! परंतु हर बार मुख्यमंत्री अशोक गहलोत का कोई ऐसा बयान आता जिसके बाद बातचीत की यह कोशिश विफल साबित होती!

ग़ौरतलब है कि 14 अगस्त से राजस्थान विधानसभा का सत्र शुरू होने जा रहा है! ऐसे में यह अंदेशा लगाए जा रहा था कि मुख्यमंत्री अशोक गहलोत कोई बिल लाकर व्हिप जारी करवा कर पायलट खेमे के विधायकों को अयोग्य साबित करवाने का प्रयास करेंगे! ऐसे में इसके आसार दिखने लगें कि सचिन पायलट के खेमे को निराशा ही हाथ लगने वाली है!

ऐसे में जब सचिन पायलट से बातचीत का एक अंतिम प्रयास किया गया! जिसमें राजस्थान से पूर्व मंत्री भँवर जितेंद्र सिंह एवं सचिन पायलट के क़रीबी दोस्त कार्ति चिदंबरम के माध्यम से ही पायलट से संपर्क साधने का प्रयास किया गया! सचिन पायलट ने भी मौक़ा नहीं गंवाते हुए राहुल गांधी एवं प्रियंका गांधी से मुलाक़ात की तथा अपनी बात रखी!

उसके पश्चात पायलट खेमे के सभी विधायकों ने दिल्ली में प्रियंका गांधी से मुलाक़ात की एवं अपना पक्ष प्रस्तुत किया इसके पश्चात पायलट पहली बार खुलकर मीडिया के सामने आए तथा अपनी बात रखी!

पायलट ने कहा कि राजनीति में अपनी भाषा पर मर्यादा रखनी चाहिए! पिछले एक माह में मेरे बारे में जो भी कहा गया उसको सुनकर दुखी हूँ परंतु मेरे मन में कोई वैरभाव नहीं है! मैं कांग्रेस पार्टी का एक सच्चा कार्यकर्ता हूँ तथा पद वापस लेना पार्टी का निर्णय होता है परन्तु मैं यह चाहता हूँ! कि मेरे कार्यकर्ताओं एवं समर्थित विधायकों को उचित सम्मान मिले हैं!

वही मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने अपने समर्थक विधायकों के साथ जैसलमेर के होटल सूर्यगढ़ में बैठक गरी जिसमें उनके समर्थित विधायकों ने बाग़ी विधायकों को सरकार एवं संगठन में न लेने की बात ही रखी!

अब इसे लेकर एक पशोपेश की स्थिति उत्पन्न हो गई है कि क्या सचिन पायलट को PCC चीफ़ एवं उपमुख्यमंत्री का पद दुबारा दिए जाएगा जिसके के आसार बहुत कम ही लगते हैं!

वही अपने राजस्थान विधायकों पर अपनी पकड़ मज़बूत साबित करके मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने अपनी सियासी मज़बूती दिखाई है! जिसके पश्चात उन्हें मुख्यमंत्री के पद से हटाना संभव नहीं लगता है!

ऐसे में यह कहा जा सकता है कि राजस्थान में पायलट के समर्थित विधायकों को सरकार में शामिल किया जा सकता है तथा सचिन पायलट को केंद्र में कोई बड़ी ज़िम्मेदारी दी जा सकती है! जिसमें कांग्रेस महासचिव का पद भी शामिल हो सकता है!

वहीं ऐसा प्रतीत होता है कि आलाकमान निर्णय मानना मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के लिए मजबूरी होगा तथा उन्हें सचिन पायलट समर्थित विधायकों को सरकार में शामिल करना ही होगा!

ऐसे में अब रही बात BJP की

भारतीय जनता पार्टी की हालत इस पूरे प्रकरण में हाथ तो आया पर मुह को न लगा जैसी हो गई है!

BJP भी इस पूरे प्रकरण के दौरान तीन धड़ों में बंटी हुई दिखाई दी जिसमें एक धड़ा पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे दूसरा धड़ा केंद्रीय मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत तथा तीसरा धड़ा सतीश पूनिया राजेंद्र राठौड़ का है!

माना जा रहा है कि पायलट के तेवर नरम पढ़ने के पीछे एक कारण पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे कि भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व से मीटिंग भी रही ऐसा माना जाता है कि सचिन पायलट ने अपने क़दम पीछे इसलिए भी खींचे क्योंकि उन्हें ये अंदेशा था कि पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे कांग्रेस सरकार को गिराने के पक्ष में नहीं है!

ऐसे में राजस्थान के सियासी घमासान में फ़िलहाल तो जीत मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की होती हुई दिखाई दे रही है! परंतु यह कहना मुश्किल है कि अंतिम जीत किसकी होगी क्योंकि अगर बग़ावत के सुर एक बार उठे हैं तो वे पुनः भी उठ सकते हैं!

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