Homeकिस्सेइतिहास के झरोखे से"तुम मुझे खून दो मैं तुम्हें आजादी दूंगा" नेताजी सुभाष चंद्र बोस

“तुम मुझे खून दो मैं तुम्हें आजादी दूंगा” नेताजी सुभाष चंद्र बोस

आजादी की बात हो और नेताजी सुभाष चंद्र बोस का जिक्र ना हो, ऐसा भला हो सकता है क्या, सुभाष चंद्र बोस केवल एक इंसान का नाम नहीं है बल्कि ये नाम है उस वीर का, जिनकी रगों में केवल देशभक्ति का खून बहता था। जब भी हम सुभाष चंद्र बोस का नाम सुनते हैं, तो सबसे पहले हमारे दिमाग में सुभाष चंद्र बोस का नारा – “तुम मुझे खून दो मैं तुम्हें आजादी दूंगा” याद आता है। नेताजी के नाम से मशहूर सुभाष चंद्र बोस एक महान स्वतंत्रता सेनानी और सच्चे देशभक्त थे। उनका जन्म उड़ीसा के कटक शहर में 23 जनवरी 1897 को हुआ था | इस साल उनकी 125वीं जयंती मनायी जाएगी | उनकी जन्म जयंती को देशभर में पराक्रम दिवस के रूप में भी मनाया जाता है |

जानिए नेताजी सुभाष चंद्र बोस के जीवन से जुड़ी ये रोचक बातें

  1. नेताजी मेधावी छात्र थे। उन्होंने भारतीय सिविल सेवा (आईसीएस) परीक्षा को क्रैक किया और 4 रैंक प्राप्त की, उन्होंने स्वतंत्रता संग्राम में हिस्सा लेने के लिए 22 अप्रैल, 1921 को भारतीय सिविल सेवा से इस्तीफा दे दिया था. साल 1921 में नेताजी सिर्फ 24 साल के थे.
  2. उन्हें उनके गुरु चित्तरंजन दास द्वारा पेश किए गए ‘फॉरवर्ड’ अखबार के संपादक के रूप में जाना जाता था। ‘स्वराज’, फिर भी उनके द्वारा एक और अखबार शुरू किया गया था। 1935 में, नेताजी की पुस्तक का नाम ‘द इंडियन स्ट्रग’ रखा गया
  3. जर्मनी में आजाद हिंद रेडियो स्टेशन की स्थापना नेताजी ने की थी। ‘जय हिंद’, ‘दिल्ली चलो’, ‘मुझे खून दो और मैं तुम्हें आजादी दूंगा’ जैसे वाक्यांश नेताजी द्वारा गढ़े गए थे।
  4. इस महान स्वतंत्रता सेनानी को 1921 से 1941 की अवधि के दौरान 11 बार कैद किया गया था। जेल में रहते हुए उन्होंने 1930 में कलकत्ता के मेयर का पद ग्रहण किया था।
  5. अंग्रेजों के खिलाफ सुभाष चंद्र बोस का पहला अवज्ञा कार्य प्रेसीडेंसी कॉलेज में था, जब उन्होंने प्रोफेसर ओटेन पर हमला किया, जिन्होंने कथित तौर पर भारत विरोधी टिप्पणी की और भारतीय छात्रों के साथ मारपीट की। उन्हें कॉलेज से निष्कासित कर दिया गया था |
  6. वह एक प्रगतिशील विचारक थे और चाहते थे कि महिलाएं अपने देश के लिए लड़ने के लिए भारतीय राष्ट्रीय सेना में भर्ती हो गए | 1943 में, सिंगापुर में भारतीयों की भीड़ को संबोधित करते हुए, उन्होंने “बहादुर भारतीय महिलाओं की एक इकाई को ‘मौत से लड़ने वाली रेजिमेंट’ बनाने के लिए कहा जो तलवार चलाएगी ,जिसे झांसी की बहादुर रानी ने 1857 में भारत के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम में शामिल किया था।” चूंकि अनुरोध अपने समय के लिए असामान्य था, इसलिए इसे बहुत आलोचना मिली।
  7. आजादी दिलाने के प्रयासों के क्रम में नेताजी एक बार हिटलर से मिलने गए | उस वक्त का एक रोचक किस्सा है | दरअसल जब वह हिटलर से मिलने गए तो उन्हें एक कमरे में बिठा दिया गया | उस दौरान दूसरा विश्व युद्ध चल रहा था और हिटलर की जान को खतरा था | अपने बचाव के लिए हिटलर अपने आस-पास बॉडी डबल रखता था जो बिल्कुल उसी के जैसे लगते थे | थोड़ी देर बाद नेता जी से मिलने के लिए हिटलर की शक्ल का एक शख्स आया और नेताजी की तरफ हाथ बढ़ाया | नेताजी ने हाथ तो मिला लिया लेकिन मुस्कुराकर बोले- आप हिटलर नहीं हैं मैं उनसे मिलने आया हूं | वह शख्स सकपका गया और वापस चला गया | थोड़ी देर बाद हिटलर जैसा दिखने वाला एक और शख्स नेता जी से मिलने आया | हाथ मिलाने के बाद नेताजी ने उससे भी यही कहा कि वे हिटलर से मिलने आए हैं ना कि उनके बॉडी डबल से | इसके बाद हिटलर खुद आया, इस बार नेताजी ने असली हिटलर को पहचान लिया और कहा, ” मैं सुभाष हूं… भारत से आया हूं.. आप हाथ मिलाने से पहले कृपया दस्ताने उतार दें क्योंकि मैं मित्रता के बीच में कोई दीवार नहीं चाहता |” नेताजी के आत्मविश्वास को देखकर हिटलर भी उनका कायल हो गया| उसने तुरंत नेताजी से पूछा तुमने मेरे हमशक्लों को कैसे पहचान लिया | नेताजी ने उत्तर दिया- ‘उन दोनों ने अभिवादन के लिए पहले हाथ बढ़ाया जबकि ऐसा मेहमान करते हैं |’ नेताजी की बुद्धिमत्ता से हिटलर प्रभावित हो गया |
  8. नेताजी ने अपनी सेक्रेटरी एमिली से शादी की थी जो कि ऑस्ट्रियन मूल की थीं। उनकी अनीता नाम की एक बेटी भी हैं, जो जर्मनी में अपने परिवार के साथ रहती हैं | नेताजी की ताकत बढ़ रही थी लेकिन अचानक 18 अगस्त 1945 को सुभाष चंद्र बोस का निधन हो गया। कहा जाता है कि सुभाष चंद्र बोस का हवाई जहाज मंचुरिया जा रहा था, जो रास्ते में लापता हो गया। आज तक ये नहीं पता चल सका कि सुभाष चंद्र बोस के हवाई जहाज का क्या हुआ, वह कहां गया?
  9. भारत के प्रमुख स्वतंत्रता सेनानी नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जयंती हर साल 23 जनवरी को मनाई जाती है। इस साल भारत सरकार ने गणतंत्र दिवस का पर्व 24 जनवरी के बजाए 23 जनवरी से मनाने का फैसला लिया है। अब से हर साल सुभाष चंद्र बोस की जयंती से गणतंत्र दिवस पर्व का आगाज होगा। भारत सरकार का यह निर्णय नेताजी के सम्मान और देश की स्वतंत्रता में उनके संघर्षों को याद रखने के लिए लिया गया है।

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